क्यों ज़रूरी है भूलना?
ताकि नए का निर्माण हो सके...
लेखक-परिचय संतोष कुमार मेरे बचपन के मित्र होने के साथ-साथ एक ज़हीन कवि भी हैं। यह थोड़े शर्मीले स्वभाव के हैं, और अपनी रचनाओं पर मिली प्रशंसा चुपचाप पढ़ना पसंद करते हैं। मेरे बहिर्मुखी स्वभाव पर उनका अडिग विश्वास है। अतः, यह अपनी रचनाएँ मेरे माध्यम से प्रकाशित करवाते रहते हैं। पाठकों से इस रचना को भरपूर स्नेह देकर इनके उत्साहवर्धन का आग्रह है। ----------------------------------------------------------------------------------------------------- भूलना चाहता हूँ लिखी अपनी पुरानी नज़्मों को, उन मिसरों को, जैसे सैलाब को दरिया भूल जाता है। उन लफ्जों को, जैसे बारिश को ज़मीं भूल जाती है। उन ठहरावों को, जैसे सफर के चेहरे बिसर जाते हैं। ये फ़ितरत नहीं मेरी कि मैं यूँ ही सब कुछ भूल जाऊँ, न कोई ऐसा मरज़ है जो मेरे ज़ेहन पे पर्दा डाल जाय। न यादें मुझसे जुदा हैं न एहसास कहीं कम हुआ है, न मेरे अल्फ़ाज़ ही कटी पतंग सा बेआसरा हुए हैं। ये भूलना दरअसल एक नई साँस को जगह देना है, ये भूलना एक नई नज़र को आंखों में उतार देना है। ये भूलना ज़ेहन में नए सिलसिले का जन्म लेना है, ये भूलना नई नज़्म का कलम पे आकर ठहर जाना है। दर्ज़ हो—मेरा भूलना जज़्बातों को महफ़ूज़ रखना है, लिखावटों में एक ख़ास तासीर को क़ायम रखना है। चाहतों में फ़ितरत के आयामों को आज़ाद रखना है, मेरा भूलना हुस्न को उसकी जगह आसीन रखना है। ये भूलना आम नहीं, ये महज़ कोई ग़फ़लत भी नहीं, ये तामीर से पहले ज़मीन को पूरा हमवार करना है। ये बिखराव नहीं, ये नए ख़्वाबों की बुनियाद रखना है, ये टूटी हुई तस्बीह को फिर से मुकम्मल पिरो देना है। मेरा ये भूलना उन वादों जैसा बिल्कुल भी नहीं, जो सियासत में अक्सर वक़्त के साथ भुला दिए जाएँ। हाँ दोनों में लगती है ताक़त ये बात तो बल्कुल सही, एक जीने की चाह है, एक चाल से फ़ायदा उठाने की।
Glossary:
नज़्म — कविता (poem)
मिसरा — पंक्ति (line of a poem)
लफ़्ज़ — शब्द (word)
सैलाब — बाढ़ (flood)
दरिया — नदी (river)
बिसर जाना — भूल जाना (to forget)
फ़ितरत — स्वभाव (nature)
मरज़ — बीमारी (disease)
ज़ेहन — मन (mind)
अल्फ़ाज़ — शब्द (words)
बेआसरा — बिना सहारे (helpless)
दर्ज़ — लिखित (recorded)
जज़्बात — भावनाएँ (emotions)
महफ़ूज़ — सुरक्षित (safe)
तासीर — असर (effect)
क़ायम रखना — बनाए रखना (to maintain)
आयाम — पहलू (dimension)
आसीन — स्थापित (seated/placed)
ग़फ़लत — लापरवाही (negligence)
तामीर — निर्माण (construction)
हमवार — समतल (level/smooth)
बिखराव — फैलाव (scattering)
बुनियाद — आधार (foundation)
तस्बीह — माला (prayer beads)
मुकम्मल — पूरा (complete)
पिरो देना — जोड़ देना (to string together)
सियासत — राजनीति (politics)

वाह, अति उत्तम।
Bahut hi badhiya kavita hai ...aanhkhri paragraph mujhe sabse zyada pasand aaya...aajkal ke political mahaul mein(हालांकि ये काफी time से aisa hi mahaul chal raha hai) last line sabse fit baithi hai😊